आप लोगो ने हमेशा सुना होगा कि किसी के ख़िलाफ़ Warrant जारी हो गया है या फ़िल्मो में देखा होगा कि पुलिस किसी को गिरफ़्तार करने गई और सामने वाले आदमी ने पुलिस से पूछा कि Warrant है क्या ?
तो चलिए जानते है कि Warrant क्या होता है कितने प्रकार का होता है और कौन सा Warrant कब जारी होता है |
Warrant क्या होता है ?
वारंट Court के द्वारा दिया गया एक लिखित आदेश होता है ,इस आदेश से Police को कोई ख़ास काम करने की अनुमति मिल जाती है ,मतलब कोर्ट को लगता है किसी काम का होना ज़रूरी है तो वारंट जारी कर देती है |
पुलिस कोई भी काम अपने से नहीं करती है वो कोर्ट के आदेश पर अग्रिम कार्रवाई करती है | जैसे कोई भी व्यक्ति बार-बार बुलाने पर भी court में नहीं जा रहा है या फिर किसी गंभीर मामले में किसी प्रकार की कार्यवाही की ज़रूरत है तो ऐसे मामले में Court लिख कर Police को आदेश देती है कि जाओ इस काम को क़ानूनी तरीक़े से कर के आओ इस को ही क़ानून की भाषा में Warrant कहते है |
इससे Police को पॉवर और उस काम को करने की अनुमति मिल जाती है | जैसे किसी व्यक्ति को पकड़ कर लाने की या गिरफ़्तार करने की ,किसी जगह की तलाशी लेने की ,या किसी समान को ज़ब्त करने की |
Warrant कितने प्रकार के होते है ?

- गिरफ़्तारी वारंट- इस में किसी व्यक्ति को गिरफ़्तार कर के लाना होता है ,अगर कोर्ट को लगता है कि व्यक्ति बार- बार बुलाने पर भी कोर्ट में नहीं आता है ,इसका मतलब है कि वो कार्यवाही से भाग रहा है ,या फिर व्यक्ति के भागने की संभावना है ,या फिर वह न्यायालय में विचारण(Trial) का सामना नहीं कर रहा है और वह मुक़दमे की कार्यवाही में उपस्थित नहीं हो रहा है | तो कोर्ट उस व्यक्ति को गिरफ़्तार करने के लिए लिखित आदेश पुलिस को देती है और पुलिस उसको गिरफ़्तार कर के कोर्ट के सामने पेश करती है |
- तलाशी वारंट- अगर कोर्ट को लगता है कोई ऐसी जगह जहां ये संदेह है कि यहाँ कुछ ऐसा समान या हथियार रखा या छुपाया गया है ,जिसको तलाश करना ज़रूरी है ,अगर कुछ मामलों को छोड़ दिया जाये तो पुलिस किसी के भी घर ऐसे ही जा कर तलाशी नहीं ले सकती है|.

तब पुलिस कोर्ट में जा कर तलाशी वारंट जारी करवाती है ,और कोर्ट को लगता है किसी मामले में तलाशी लेना ज़रूरी है उसके बिना वो सत्य तक नहीं पहुँचा सकते तब कोर्ट तलाशी वारंट जारी कर देती है | उसके पुलिस उस स्थान,घर दुकान इत्यादि की तलाश पुलिस ले सकती है | - ज़ब्ती वारंट- अगर किसी मामले से कोई चीज़ या वस्तु संबंधित है उसको ज़ब्त कर लें जैसे नक़ली नोटों का मामला है या कोई नक़ली खाने का सामान है या किसी का खून हो गया है उसमे इस्तेमाल की गई गाड़ी है या हथियार है | ऐसे मामलो में कोर्ट जब्ती वारंट जारी करती है |

क्या वारंट और समन(Summons) एक होता है ?
ध्यान रहे वारंट और समन(Summon) एक नहीं होता है दोनों अलग अलग चीज़ होती है | समन एक बुलावा होता है | इस को ऐसे समझते है जैसे अगर पुलिस किसी व्यक्ति के घर समन ले कर जाएगी तो वो उस व्यक्ति को कहेगी की आप को इस तारीख़ को कोर्ट में हाज़िर होना है | लेकिन अगर पुलिस वारंट के कर आई है तो वो किसी ना किसी प्रकार की कार्यवाही कर के जाएगी |
समन क्यों जारी होता है –
- आरोपी को अदालत में बुलाने के लिए |
- गवाह को बयान देने के लिए बुलाने के लिए |
- किसी दस्तावेज या सबूत को प्रस्तुत करने के लिए |
समन में क्या -क्या होता है ?
- अदालत का नाम |
- केस का विवरण |
- जिस व्यक्ति को बुलाया जा रहा है उसका नाम ,पता |
- उपस्थित होने की तारीख़,समय,कोर्ट नंबर |
- अदालत की मुहर और सिग्नेचर |
समन मिलने पर क्या करना चाहिए ?
- उसी तारीख़ में अदालत में मौजूद हो |
- किसी अच्छे वकील से संपर्क करे |
- अगर बिना किसी उचित कारण के व्यक्ति उस दिन अदालत में नहीं गया तो अदालत आगे की कार्रवाई कर सकती है |

सुमित कुमार एक अनुभवी क़ानूनी पेशेवर वकील है ,जिनका मुख्य उद्देश क़ानून की जटिलताओं को आसान भाषा में बताना है | क्रिमिनल और सिविल क़ानून के क्षेत्र में 5 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ,इस क्षेत्र में अपने काम के मध्यम से व्यापक रूप में योगदान दिया है |


