Caveat Petition क्या है? कब,कौन,कैसे दाखिल करे | पूरी जानकारी (2026)

Caveat एक लैटिन शब्द है जिसका मतलब होता है Be Aware = सचेत रहना/ सावधान रहना |  Caveat एक सूचना है जो एक पार्टी के द्वारा कोर्ट को दी जाती है जिसमे ये कहा जाता है कि किसी केस में कोर्ट एप्लिकेंट(आवेदक) को बिना Notice भेजे विपक्षी पार्टी को कोई भी रिलीफ ना दे और ना ही कोई आगे की कार्यवाही करे |

Caveat

यह एक तरह का बचवा होता है ,जो एक पार्टी के द्वारा लिया जाता है | Civil Procedure Code – Section 148(A) के अन्तर्गत ये Petition दाखिल की जाती है| Caveat दाखिल करने वाले व्यक्ति को Caveator कहा जाता है | इस का मतलब होता है कि आप कोर्ट से अनुरोध कर रहे है कि अगर किसी व्यक्ति ने कोर्ट में कोई मामला दर्ज किया है जिसमे आप का कोई वैध हित है तो कोर्ट के द्वारा उस केस में कोई भी आदेश पारित नहीं किया जाना चाहिए |

उस मामले में कोर्ट कोई भी आदेश देने से पहले व्यक्ति को सुनेगी उसके बाद ही कोई फ़ैसला लेगी | यह याचिका एक बचाव होती है इसका फ़ायदा लोग तब लेते है ,जब उनको लगता है कि किसी केस में उनके ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई की जा सकती है |

Caveat पेटिशन की वैधता कितने दिनों की होती है ?

इस पेटिशन की वैधता 90 दिनों तक होती है | यानी की जिस दिन आप Caveat petition कोर्ट में दाखिल कर देते है उसके 90 दिनों तक वो प्रभाव में रहती है | अगर विरोधी पार्टी के द्वारा 90 दिनों के अंदर कोर्ट में कोई भीं केस आप के ख़िलाफ़ दाखिल किया जाता है ,तो कोर्ट के द्वारा एक नोटिस भेज कर आप को सूचित किया जाता है |

Caveat

अगर एक बार 90 दिनों का समय पूरा हो जाता है ,तो दुबारा व्यक्ति को कैवेट petition दाखिल करना होगा | व्यक्ति को Petition में विरोधी पार्टी का नाम बताना होता है जिस पर आप को शक होता है कि वो आप के ख़िलाफ़ कोई केस कर सकता है |

Section 148(A) CPC में Caveat को दायर करने के अधिकार

जब किसी व्यक्ति को लगता जेल की विरोधी पार्टी कोई केस करने वाली है ,तो उसी कोर्ट में कैविएट petition दाखिल कर दी जाती है ,ताकि विरोधी पार्टी जब भी कोर्ट में कोई भी गतिविधि करेगी ,तो आप को सूचित कर दिया जाएगा |

Caveat Petition कौन दायर कर सकता है ?

ऐसा व्यक्ति जिसको डर है कि विरोधी पार्टी उसके ख़िलाफ़ कोई केस कर सकती है ,तो ऐसा व्यक्ति कैविएट Petition लगा सकता है | एक बार अगर petition दाखिल कर दी जाती है तो ये कोर्ट की ड्यूटी होती है कि वो उस Caveator को नोटिस भेजे और उस व्यक्ति को केस के बारे में सूचित करे ,जो उसके ख़िलाफ़ केस दाखिल हुआ है |

Caveat Petition में किन बातो का होना ज़रूरी होता है |

  1. कोर्ट का नाम | 
  2. केस नंबर- अगर केस को कोई नंबर है तो वो भी Petition पर लिखना ज़रूरी है |
  3. Caveat दायर करने वाले व्यक्ति का नाम |
  4. केस का सम्पूर्ण विवरण |
  5. Caveator का पूरा पता – पता एक दम साफ़-साफ़ लिखा होना चाहिए ,ताकि उसी पाते पर कोर्ट के द्वारा उसको नोटिस/सूचना भेजी जा सके |

कैविएट Petition का उपयोग कब होता है ?

ये petition आमतौर पर इन मामलो में दाखिल किया जाता है :-

  • Property Disputes
  • Injunction Cases
  • Family Disputes
  • Contract Disputes
  • Court Orders रोकने के लिए |

कैविएट Petition के फ़ायदे

  • Ex- Parte order से सुरक्षा मिलती है |
  • Court में सुनवाई का मौक़ा मिलता है |
  • Legal Rights सुरक्षित रहते है |
  • Opposite Party बिना सूचना के फायदा नहीं उठा सकती |

कैविएट Petition के नुक़सान

  • यह सर्फ़ 90 दिन तक valid रहता है |
  • हर केस में ज़रूरी नहीं होता है |
  • केवल Preventive Measure है, Final Remedy नहीं है |
  • हर बार Renewal करवाना पड़ता है |

कैविएट Petition पर Important Case

Kattil Vayalil Parkkum Koiloth v. Mannil Paadikayil Kadeesa Umma (1996)

दीपक खोसला बनाम भारत संघ और अन्य, 11 मई, 2011

 इस केस से साफ़ होता है कि कैविएट का उद्देश Fairness और justice देना है | कोर्ट ने ये भी कहा कि बिना कैविएट के Ex-Parte ऑर्डर Valid हो सकता है ,लेकिन कैविएट होने पर नोटिस देना ज़रूरी है |

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1- कैविएट Petition क्या है ?

Ans. यह एक क़ानूनी चेतावनी है जिससे बिना सभी पार्टी सुने आदेश नहीं दिया जा सकता |

Q2- कैविएट कौन फाइल कर सकता है ?

Ans.कोई भी व्यक्ति जिसके ख़िलाफ़ केस होने की संभावना हो |

Q3- इस की Validity कितने दिन तक रहती है ?

Ans. 90 दिन |

Q4- क्या हर case में ज़रूरी है?

Ans. नहीं |

Q5- क्या इससे केस रुक जाता है ?

Ans. नहीं,सिर्फ़ बिना सुने आदेश नहीं दिया जाता है |

 

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