Writ (रिट) Petition या रिट याचिका एक प्रकार का लिखित आदेश है जो कोर्ट के द्वारा किसी सरकारी संस्थान को कोई काम करने या ना करने के लिए दिया जाता है | संविधान के भाग 3 में मूल अधिकारों (Fundamental Rights) का उल्लेख किया गया है |
संवैधानिक उपचारों संबंधित मूल अधिकार का प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 32-35 में किया गया है | यदि किसी व्यक्ति के मूल अधिकार का उल्लंघन राज्य के द्वारा किया जाता है तो राज्य के विरूद्ध न्याय पाने के लिए संविधान के अनुच्छेद 32 के अन्तर्गत सुप्रीम कोर्ट में जबकि अनुच्छेद 226 के अन्तर्गत हाई कोर्ट में Writ याचिका दाखिल करने का अधिकार दिया गया है |
रिट (Writ) कितने प्रकार की होती है ?
- बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus)
- परमादेश (Mandamus)
- प्रतिषेध ( Prohibition)
- उत्प्रेषण ( Certiorari)
- अधिकार-पृच्छा ( Quo Warranto)
1-बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus)- ये एक लैटिन शब्द है जिसका अर्थ होता है “Produce the body” शरीर को पेश करना इस का सरल भाषा में मतलब होता है बंदी या व्यक्ति को सामने लाना | ये याचिका उस अधिकारी के विरुद्ध दायर की जाती है ,जो किसी व्यक्ति को बंदी बना कर रखता है | इस writ को जारी कर के गिरफ़्तार करने वाले अधिकारी को यहाँ निर्देश दिया जाता है ,की वो गिरफ़्तार व्यक्ति को कोर्ट के सामने पेश करे |

ये याचिका पीड़ित व्यक्ति की तरफ़ से कोई भी दायर कर सकता है | पीड़ित व्यक्ति को कोर्ट में उपस्थित होना ज़रूरी नहीं है | ये फ़ैसला Kanu Sanyal Vs District Magistrate,Darjeeling AIR 1983 SC 653 के बाद आया था |
ये याचिका अवैध गिरफ़्तारी के विरूद्ध क़ानूनी राहत प्रदान करती है | ये सुनिश्चित करता है कि गिरफ़्तार व्यक्ति को कोर्ट के सामने प्रस्तुत किया जाये जिसके अन्तर्गत ये सुनिश्चित किया जाये कि व्यक्ति की गिरफ़्तारी वैध है कि नहीं ,अगर गिरफ़्तारी वैध नहीं है ,तो व्यक्ति की गिरफ़्तारी रोक दी जाती है |
2- परमादेश (Mandamus)- इस का मतलब होता है “To Give The Mandate” हिन्दी में इसका मतलब होता है “हम आदेश देते है “ इस याचिका के अन्तर्गत कोर्ट से ये अपील की जाती है ,कोर्ट इस प्रकार का आदेश दे कि कोई भी सरकारी संस्थान या कोई भी लोक अधिकारी अपने कर्त्तव्यों का पालन करे |

अगर कोई लोक अधिकारी है जो क़ानून के हिसाब से काम नहीं कर रहा है ,तो Supreme Court या High Court में ये याचिका दायर की जा सकती है | इस याचिका के द्वारा किसी लोक अधिकारी के अलावा अधीनस न्यायालय या निगम के अधिकारी को भी यह आदेश दिया जा सकता है कि वो उसे दिये गये काम को करे या कर्तव्यों का पालन करे |
लेकिन इस याचिका को राष्ट्रपति(President) या राज्यपाल(Governor) के ख़िलाफ़ दाखिल नहीं किया जा सकता है |
3-प्रतिषेध ( Prohibition)- इस का मतलब होता है माना करना या रोकना ,सरल भाषा में इसको स्ट्रे ऑर्डर (Stay Order) के नाम से जाना जाता है | जब भी कोई निचली कोर्ट अपनी शक्ति या अधिकार क्षेत्र से बाहर काम करती है ,तो ये Writ High Court के द्वारा निचली कोर्ट या ट्रिब्यूनल कोर्ट को जारी की जाती है |

ये निचली कोर्ट को क्षेत्त्राअधिकार से बाहर काम करने से रोकती है | जैसे अगर डिस्ट्रिक्ट कोर्ट High कोर्ट के निर्णय के ख़िलाफ़ कोई भी अपील सुनती है ,लेकिन डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के पास ऐसी अपील सुनने का क़ानून के द्वारा कोई भी शक्ति प्रदान नहीं की गई है | ऐसे मामलो में एक Prohibition याचिका जारी की जाएगी |
4- उत्प्रेषण ( Certiorari)- इसका अर्थ होता है “Produce The Certificate” जब भी किसी मामले में High Court या Supreme Court को लगता है किसी केस का पुनरावलोकन( Revision) उसको ख़ुद करना चाहिए,तो यूपर की कोर्ट निचली कोर्ट से Certiorari जारी कर ,उस केस को अपने पास मँगवा लेती है ,लेकिन केस को अपने पास मँगवा लेने से ये मतलब बिलकुल नहीं है कि High Court या Supreme कोर्ट का निर्णय निचली कोर्ट के ख़िलाफ़ ही हो |

उत्प्रेषण Writ जारी करने के लिए शर्ते
- जब एक निचली कोर्ट अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर कार्य करती है और उसे प्रदान किए गए क्षेत्राधिकार का दुरुप्रयोग करती है |
- यह रिट तब भी जारी की जा सकती है जब निचली कोर्ट के द्वारा अपनाई जाने वाली प्रक्रिया में कोई मौलिक ख़ामी हो या प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन हो |
- यह रिट तब भी जारी की जा सकती है जब गलती क़ानून की अवहेलना पर आधारित हो |
5- अधिकार-पृच्छा ( Quo Warranto)- इस का मतलब ये है कि Supreme Court या High Court किसी भी लोक अधिकारी से यह पूछ सकता है ,की आप किस क्षमता से इस पद पर कार्यरत है ?

ये उस व्यक्ति के विरूद्ध जारी किया जाता है ,जो किसी ऐसे लोक पद को धारण करता है ,जिसको धारण करने का अधिकार उसको नहीं है |

सुमित कुमार एक अनुभवी क़ानूनी पेशेवर वकील है ,जिनका मुख्य उद्देश क़ानून की जटिलताओं को आसान भाषा में बताना है | क्रिमिनल और सिविल क़ानून के क्षेत्र में 5 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ,इस क्षेत्र में अपने काम के मध्यम से व्यापक रूप में योगदान दिया है |


