ARMS ACT- गिरफ़्तारी और तलाशी के नियम !पूरी जानकारी

आप लोगो ने अक्सर सुना होगा कि कुछ लोग किसी वारदात को अंजाम देने जा रहे थे और पुलिस ने उनको पकड़ा तो उसके पास से कट्टा/पिस्टल बरामद हुआ और पुलिस ने उनके ऊपर Arms Act में कार्रवाई कर दी |

तो चलिए जानते है ,Arms Act क्या है और पुलिस प्रशासन इस Act के अंदर क्या कार्रवाई कर सकती है |

Arms Act में Arrest और Search का क्या प्रोसेस है ?

Arms Act में 37 सेक्शन है जो ये कहता है “Arrest and search process will be conducted as per provisions of BNSS”  यानी की search,seizure,arrest,seizure list बनाना ये सारा प्रोसेस BNSS के प्रोवीज़न के हिसाब से होगा |

मान लीजिए चार लोगो को पुलिस ने पकड़ा ,उसके बाद police उन लोगो को सर्च करेगी ,अगर उनके पास से कुछ बरामद होगा तो पुलिस seizure list(ज़ब्त सूची) बनाएगी |

Arms Act का सेक्शन 37 यही कहता है इस सब चीज़ का प्रोसेस BNSS के हिसाब से होगा |

BNSS में कहाँ पर इन प्रोविजन को मेंशन किया गया है | BNSS में कहाँ बताया गया है कि सारा प्रोसेस कैसे होगा | पुलिस ये प्रक्रिया कैसे करेगी |

BNSS की धारा 103(4),105,185  इससे संबंधित है |ये सारी धारा किस-किस नियम और शर्त का उल्लेख करती है |

Arms Act -गिरफ़्तारी के समय नियम

जब पुलिस किसी को पकड़ती है तो ये प्रक्रिया करते समय या किसी को गिरफ़्तार करते समय कौन से नियम का पालन करना चाहिए |

किसी को अरेस्ट करते समय या सर्च और seizure करते समय पुलिस को दो स्वतंत्रगवाह( Independence Witnesses)  की ज़रूरत होती है | पुलिस उनके सामने ही ये कार्यवाही कर सकती है | अगर पुलिस किसी को गिरफ़्तार कर के थाने लायी है तो इस की क्या गारंटी है ही पुलिस सही बोल रही है ,पुलिस उस व्यक्ति को फर्जी भी फँसा सकती है |

इस से ये पता चलता है कि पुलिस वाले सही से प्रक्रिया का पालन किए है कि नहीं ,हो सकता है कि पकड़ा गया व्यक्ति ने सही में ये जुर्म किया हो | इस में seizure रिपोर्ट में दोनों स्वतंत्रगवाह  से पहले पुलिस वाले अपनी तलाशी करवाते है की देख लीजिये मेरे पास तो कुछ नहीं है उसके बाद पुलिस वाले उस व्यक्ति को सर्च करेंगे |

सर्च(Search) और सीजर(seizure) करने के बाद जो रिपोर्ट होगी उन पर उन दोनों गवाह के सिग्नेचर होना ज़रूरी है |

Recording(रिकॉर्डिंग)-  सर्च और सीजर का जो भी प्रोसेस होगा ,उन सब की रिकॉर्डिंग बनानी होगी | पुलिस वाले मोबाइल से भी वीडियो/ऑडियो बना सकते है |

उस के बाद जो भी वीडियो/ऑडियो पुलिस वाले रिकॉर्ड किए है ,उसको बिना किसी भी प्रकार की देरी किए बिना DM,SDM,या Judicial Magistrate 1st class जो की सबसे पास होगा मतलब जहां पुलिस पहले पहुँच सकती है उनके सामने पेस करेंगे |

ऊपर दिये गये प्रोविजन Crpc में नहीं था , इस को BNSS में जोड़ा गया है ताकि फ़र्ज़ी केस को रोकने में आसानी हो सके |

इस में अभी क्या समस्या(Problem) है |

इस में अभी भी बहुत सी समस्या है जैसे इस में  दो स्वतंत्रगवाह( Independence Witnesses)  का उल्लेख है ,मान लीजिए किसी को पुलिस ने रात के 10:30 बजे घर,खेत,सुनसान इलाक़े से  गिरफ़्तार किया ,तो वहाँ पर इतनी रात में किसी के होने की संभावना बहुत कम है |

पुलिस FIR में कहेगी कि गस्त करते समय हमको सूचना मिली कि कुछ व्यक्ति किसी बड़ी वारदात को करने के लिए किसी जगह जामा हुवे है | तो वहाँ पर किसी स्वतंत्रगवाह( Independence Witnesses) का मिलना आमतौर पर मुश्किल है |

वहाँ पर पुलिस क्या करती है वो अपनी ही टीम में से दो पुलिस वालों को स्वतंत्रगवाह( Independence Witnesses) बना कर इस कंडीशन को पूरा कर लेती है |

इस में रिकॉर्डिंग वाली कंडीशन को पुलिस ऐसे पूरा करती है जैसे मान  लीजिए पुलिस ने किसी को स्थान A पर गिरफ़्तार किया और उसको ले कर थाने चली गई और वहाँ पर जहाँ पर CCTV कैमरा नहीं है ,वहाँ पर उसको रखते है और वीडियो रिकॉर्डिंग करते है |

आमतौर पर पुलिस वाले उसको कट्टा या पिस्टल देते है और कहते है इसको निकलो और अपने हिसाब से वीडियो रिकॉर्ड करते है लेकिन नियम ये है कि जहाँ से व्यक्ति को गिरफ़्तार किया गया है वही पर ऑडियो / वीडियो रिकॉर्डिंग करनी होती है |

उस वीडियो /ऑडियो को वो व्यक्ति ट्रायल में चैलेंज कर सकता है |

नये BNSS में एक क़ानून ये भी है कि ऑडियो/वीडियो की रिकॉर्डिंग को 24 घंटे के अंदर बिना किसी भी प्रकार की देरी किए बिना DM,SDM,या Judicial Magistrate 1st class जो की सबसे पास होगा मतलब जहां पुलिस पहले पहुँच सकती है उनके सामने पेस करेंगे |

लेकिन पुलिस वाले किसी व्यक्ति को 1 जनवरी को गिरफ़्तार किया और उसको मजिस्ट्रेट के सामने 5 जनवरी को पेश किया ,और व्यक्ति को तीन दिन अपने थाने में रख कर अपने हिसाब से केस बनाते है ,और अपनी सुविधा के हिसाब से तोड़मरोड़ कर पेश करते है |

Arms Act- ग़लत गिफ़्तारी पर क्या करे ?

Arms Act

मान लीजीये पुलिस ने किसी की झूठी गिरफ़्तारी की और आर्म्स उसके घर में या उसके पास ख़ुद की राख देती है ,एक दो दिन बाद व्यक्ति को मजिस्ट्रेट के सामने पेश करे तो इस पारिस्थिति में क्या करना चाहिए |

अगर पुलिस आप के घर आये तो सब से पहले आप को डरना बिलकुल भी नहीं है | कोशीश करे की पुलिस की वीडियो बना ले | क्योंकि अगर पुलिस सही होगी तो वो ख़ुद की व्यक्ति के घर के सामने अपना नाम और रैंक बताते हुवे वीडियो बनाएगी |

अगर पुलिस किसी को गिरफ़्तार कर के ले जा रही है तो कोशीश करे की व्यक्ति की वैन में बैठे हुए फोटो या वीडियो बना ले |

ताकि पुलिस बाद में ये ना कह सके कि हमने किसी को गिरफ़्तार नहीं किया था |

अगर किसी भी वजह से व्यक्ति या उसके परिवार वालों ने वीडियो नहीं बना पाये तो अग़ल बग़ल CCTV में अगर फुटेज मिल जाये तो उसको संभल कर रखे ताकि बाद में काम आये |

उसके बाद व्यक्ति के परिवार वाले किसी अच्छे वकील से संपर्क करे ताकि वो बता सके की तुरंत में क्या करना चाहिए |

वकील व्यक्ति की एप्लीकेशन लिख देगा जिस में सारी बाते होगी और घटना की फोटो भी लगाएगा | उसके बाद एप्लीकेशन किस-किस को देना है |

अगर कोई व्यक्ति बेक़सूर है तो उसको ये काम ज़रूर करना चाहिए ,हो सकता है कि इससे उसको तुरंत मदद मिल जाये |
अगर व्यक्ति को किसी भी प्रकार की मदद नहीं मिली और उसको पुलिस जेल भेज देती है तब भी bail लेने में उसको मदद मिलेगी |

इस का एक फ़ायदा ये भी है पुलिस व्यक्ति को 24 घंटे के अंदर ही मजिस्ट्रेट के सामने पेश कर देगी और व्यक्ति पुलिस के टॉर्चर से बच जाएगा |

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