किसी भी व्यक्ति के द्वारा किसी भी काम को करने या ना करने के लिए की गई लिखित रूप से घोषणा को Affidavit(शपथ पत्र) कहा जाता है | ये घोषणा ऐसे व्यक्ति के सामने की जाती है जो की Notary Officer या Oath Commissioner हो इन दो व्यक्ति के सामने ये लिखित घोषणा की जाती है |

शपथ पत्र को English में Affidavit और उर्दू में हलफ़नामा भी कहते है | इस का इस्तेमाल बहुत सी जगह में किया जाता है जैसे सरकारी या ग़ैर- सरकारी | उदाहरण के लिए जन्म प्रमाण पत्र,जाती प्रमाण पत्र,मैरिज सर्टिफिकेट,राशन कार्ड इत्यादि |
यदि किसी के ख़िलाफ़ कोर्ट में सिविल मामला चल रहा है तो उसके लिए भी कोर्ट में आप को शपथ पत्र देना होता है | कोर्ट के मामले में व्यक्ति को शपथ पत्र एक नार्मल पेपर में दिया जाता है उसको बाद में Notary Officer या Commissioner से अटेस्ट करवाना होता है |
शपथ पत्र (Affidavit) में दी गई जानकारी या बयान ग़लत नहीं होने चाहिए ,उसमे लिखी गई बात एक दम सही और सत्य होनी चाहिए ,अगर इसमें दी गई जानकारी सही नहीं है ,तो जिस काम के लिए शपथ-पत्र दिया गया है ,तो पंजीकरण प्राधिकारी उस काम को ख़ारिज या निरस्त कर देगा |
अगर किसी स्टूडेंट को कॉलेज में एडमिशन लेते समय दो साल का अंतराल हो गया है तो इसके लिए भी शपथ-पत्र देना होता है |
Affidavit(शपथपत्र) कितने प्रकार के होते है ?
अगर हम क़ानूनी रूप से देखे तो शपथपत्र दो प्रकार के होते है ,जैसे-
1- न्यायिक शपथपत्र (Judicial Affidavit)- जब अदालत में कोई मुक़दमा होता है ,तो उस समय दाखिल किया जाता है |
2- ग़ैर- न्यायिक (Non – Judicial Affidavit)- बैंक,पासपोर्ट,इत्यादि के काम में इस्तेमाल होने वाले |
- नाम परिवर्तन शपथपत्र
- जन्मतिथि शपथपत्र
- पता/निवास शपथपत्र
- जाती शपथपत्र
- आय शपथपत्र
- चरित्र शपथपत्र
- वैवाहिक स्थिति शपथपत्र
- पहचान शपथपत्र
- उत्तराधिकारी शपथपत्र
- खोए हुए दस्तावेज के लिये शपथपत्र
- पासपोर्ट के लिए शपथपत्र
- बैंक खाते से संबंधित शपथपत्र
- डुप्लीकेट प्रमाणपत्र के लिए शपथपत्र
जब किसी सरकारी या ग़ैर सरकारी विभाग के अंदर इस का प्रयोग होता है प्राइवेट कंपनी में भी शपथपत्र का इस्तेमाल होता है जैसे ,मैरिज,आय,जाति ,प्रमाणपत्र के रूप में ,इस में घोषणा की गई सारी जानकारी एक दम सही और सत्य होनी चाहिए |
अगर किसी व्यक्ति का कोर्ट में मुक़दमा चल रहा है तो वो अपना शपथपत्र देता है ,इस में ध्यान देने वाली बात ये है कि ये दो प्रकार के होते है ,जैसे अगर कोई व्यक्ति मौखिक रूप से शपथपूर्वक बयान करता है ,और वो बयान कोर्ट के सामने लिख कर देना होता है |
दूसरा शपथपत्र वो होता है जो सिविल केस में गवाही के रूप में दिया जाता है | ये शपथपत्र साधारण पेपर पर दिया जाता है ,जिसके ऊपर कोर्ट का नाम लिखा होता है ,और Notary के द्वारा अटेस्ट किया होता है |
अगर कोई भी व्यक्ति HighCourt या Supreme Court में कोई भी याचिका दायर करता है ,जिसमे भी शपथपत्र का इस्तेमाल होता है ,जिसमें सारे तथ्य और जानकारी एकदम सही और सत्य होने चाहिए |
ग़लत Affidavit(शपथपत्र) देने पर क्या कार्यवाही होती है |

The Indian Oaths Act 1969 के अंदर ये तय है कि जो भी घोषणा या बयान शपथपत्र के अंदर दिये जाएँगे ,वो बिलकुल सत्य होने चाहिए ,यदि कोर्ट के सामने किसी व्यक्ति के द्वारा ग़लत शपथपत्र दिया जाता है या झूठी जानकारी दी जाती है ,और उस व्यक्ति को ये बात मालूम होते हुए भी शपथपत्र दे देता है |

तो कोर्ट उस व्यक्ति पर BNSS-379 के अन्तर्गत मुक़दमा दायर करने का आदेश दे सकती है ,और उस व्यक्ति को IPC-229 के अन्तर्गत सात साल की सज़ा हो सकती है |

आप लोगो ने एक बात और भी देखी होगी कि शपथपत्र अलग-अलग स्टाम्प पेपर पर बनाये जाते है | सब की क़ीमत अलग होती है | कितने रुपये के स्टाम्प पेपर पर शपथपत्र बनेगा ये अथॉरिटी पर निर्भर होता है | जिस भी प्रकार का शपथपत्र आप से माँगा गया है ,वो उतने की रुपए के स्टाम्प पेपर पर देना होता है जितना की अथॉरिटी आप से बोले ,और कोर्ट में तो शपथपत्र दिया जाता है ,उस पर कोई भी स्टाम्प ड्यूटी नहीं लगती है |
Affidavit(शपथपत्र) की भाषा क्या होनी चाहिए ?

शपथपत्र की भाषा हिन्दी या इंगलिश होनी चाहिए | निचली अदालतों में शपथपत्र हिन्दी में दिया जाता है ,लेकिन HighCourt और Supreme Court में इंग्लिश में शपथपत्र देना अनिवार्य होता है |
Affidavit(शपथपत्र)Attested कैसे और कहाँ करवाए |
अगर व्यक्ति ने जन्म प्रमाणपत्र या मैरिज प्रमाणपत्र इत्यादि बनवाया है तो वो 50 रुपये के स्टाम्प पेपर पर बनता है ,उसके बाद उसको Notary Officer अटेस्ट करता है |
अगर शपथपत्र को कोर्ट के सामने देना है तो उस शपथपत्र को Oath Commissioner जिसको शपथआयुक्त भी कहा जाता है ,वो अटेस्ट करते है |
कोर्ट के सामने शपथपत्र देने के लिए स्टाम्पपेपर की ज़रूरत नहीं होती है |

सुमित कुमार एक अनुभवी क़ानूनी पेशेवर वकील है ,जिनका मुख्य उद्देश क़ानून की जटिलताओं को आसान भाषा में बताना है | क्रिमिनल और सिविल क़ानून के क्षेत्र में 5 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ,इस क्षेत्र में अपने काम के मध्यम से व्यापक रूप में योगदान दिया है |


