उत्तर प्रदेश में “Gangster Act” का पूरा नाम है:” Utter Pradesh Gangsters and Anti-Social Activities(Prevention) Act 1986” यानी “उत्तर प्रदेश गिरोहबंद और समाज विरोधी क्रियाकलाप(निवारण) अधिनियम,1986”| जिस को सामान्य रूप में आप UP Gangster Act के नाम से जानते है |
इस एक्ट को लाने का मुख्य उपदेश ये था की जो दुर्दांत अपराधी है माफिया है उनके अपर प्रभावी रूप से कार्यवाही कर सके | ताकि इनका आतंक और भय जो समाज में व्याप्त है उसको समाप्त किया जा सके ,जिससे समाज में क़ानून के प्रति लोगो की आस्था बनी रहे |
जो भी व्यक्ति ,हत्या जैसे अपराध,मानव शरीर के प्रति किए गए बलात्कार जैसे अपराध,जिसमे वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश में जो नियमावली बनी है 2021 उसके अंदर अगर कोई गैंगरेप करता है किसी महिला के साथ तो ऐसे लोगो के उपर भी Gangster Act के अंदर कार्रवाई की सा सकती है |

के अलावा 129,74,131,132,133 BNS के अंदर अगर कोई अपराध करता है तो उसके ऊपर भी Gangster Act के अन्तर्गत कार्रवाई की जा सकती है | वर्तमान में अगर ऊपर दिये गये किसी भी सेक्शन में उस के ऊपर एक भी मुक़दमा दर्ज है तो उसके अपर भी Gangster Act की कार्रवाई हो सकती है |
इस के अलावा पशु क्रूरता निवारण अधिनियम (Prevention of Cruelty to Animals Act 1960) के अन्तर्गत अगर कोई व्यक्ति अवैध रूप से पशुओं का व्यापार करता है या जिन जानवर को मारने पर सरकार ने प्रतिबन्द लगा रखा है उनको मारता है तो उस व्यक्ति पर भी Gangster Act के अन्तर्गत कार्रवाई की जा सकती है |
जो लोग अवैध रूप से नशीली चीज़े जैसे ड्रग्स ,ज़हरीली शराब बनाते है या बेचते है या अवैध रूप से हथियार बनते या बेचते है तो उनके ऊपर भी इस एक्ट के अन्तर्गत कार्रवाई की जा सकती है |
ध्यान देने वाली बात ये है कि अगर आप के ऊपर एक भी मुक़दमा है तब भी आप पर Gangster Act में कार्रवाई हो सकती है |
Gangster Act में कार्रवाई कौन करता है ?
इस एक्ट में हमेशा कार्यवाही राज्य(State) की तरफ़ से की जाती है और राज्य की तरफ़ से पुलिस ये कार्रवाई करती है | इस में कांस्टेबल या पुलिस का कोई भी ऑफिसर ही शिकायतकर्ता होगा और उसकी शिकायत पर डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट(DM) इस कार्रवाई के लिए अनुमति देता है |
अगर किसी व्यक्ति के ऊपर कोई भी केस दर्ज होता है ,तो उसके ही अधर पर उसपर इस एक्ट के अंदर कार्रवाई होती है |
Gangster Act में जमानत कैसे होती है ?
जिस भी व्यक्ति पर इस एक्ट के अंदर कार्रवाई होती है तो उसका मामला स्पेशल कोर्ट (Special Court) में सुना जाएगा |
सेक्शन 19(4)(B) Gangster Act में ये प्रावधान है ऐसे व्यक्ति को जमानत देने से पहले जो भी लोक अभियोजक(public prosecutor) होगा उसका पक्ष सुना जाएगा ,उसके बाद की ऐसा व्यक्ति को जमानत दी जाएगी | आमतौर पर देखा गया है ऐसे मामलों में कोर्ट व्यक्ति को जमानत नहीं देती है |
इस एक्ट में जमानत लेने के लिए एक बात का ध्यान रखें कि जिस भी अपराध में आप पर Gangster Act लगा है ,अगर उस केस में आप को जमानत मिल गई है तो आप को गैंगस्टर एक्ट में भी जमानत मिल जाएगी | जैसे अगर आप को हत्या के आरोप में जेल भेजा गया था ,और आप पर गैंस्टर एक्ट लग गया है तो अगर आप को इस मामले में जमानत मिल गई है तो आप को इस एक्ट में भी जमानत मिल जाएगी |
स्पेशल कोर्ट में जमानत मिलना मुश्किल होता है इसलिए व्यक्ति हाई कोर्ट में जमानत के लिए जा सकता है अगर हाई कोर्ट से उसको जमानत मिल गई ,तो व्यक्ति उस ऑर्डर की सर्टिफ़ाइड कॉपी लगा कर स्पेशल कोर्ट में जमानत के लिये आवेदन कर सकते है इससे व्यक्ति के जमानत की संभावनायें ज़्यादा हो जाएगी |
Gangster act में कितनी सजा होती है ?
इस एक्ट में सजा भी उन व्यक्तियों को होती है ,जिनको उनके बेसिक केस में सजा होती है जैसे किसी व्यक्ति को हत्या करने,रेप करने,जुआ खिलाने,नशीली चीजे बनाने या उसका व्यापार करने,अवैध हथियार बनाने या बेचने और भी कई संगीन अपराध में व्यक्ति के ऊपर गैंगस्टर लगा है और अगर उसमें उसको साजा हो गई है तो उसको गैंगस्टर एक्ट में भी साजा हो जाएगी |
लेकिन अगर व्यक्ति के ऊपर ज़्यादा केस है और कुछ में वो बरी हो जाता है और कुछ में उसको सजा हो जाती है ,तो कही ना कही Gangster Act में भी व्यक्ति को सजा हो सकती है |
अब सवाल ये आता है की सज़ा होगी तो कितनी होगी ,इस पर सेक्शन 3(1) Gangster Act में प्रावधान है कि किसी व्यक्ति को कम से कम 2 साल और ज़्यादा 10 साल की सज़ा और 5000 का जुर्माना हो सकता है |
इस में ध्यान देने की बात ये है 2021 में इस एक्ट में संशोधन किया गया है और अब किसी नाबालिग पर भी Gangster Act की कार्रवाई हो सकती है |
Gangster Act में संपत्ति ज़ब्त कैसे होती है |
सेक्शन 14(1) गैंगस्टर एक्ट में ये प्रावधान है ,की कोई भी व्यक्ति जिसने भी अपराध कर के संपत्ति अर्जित की है ,जैसे की किसी ने लूटपाट करके ,या कोई व्यक्ति भूमाफ़िया था और उसने अवैध तरीक़े से संपत्ति बनायी है ,तो ऐसे व्यक्ति की उस संपत्ति को ज़ब्त किया जाएगा |
इस सेक्शन में यही प्रावधान है | जिस अपराध की वजह से व्यक्ति पर गैंगस्टर एक्ट में कार्रवाई हुई है उस अपराध से अर्जित की गई संपत्ति की ज़ब्त की जाएगी | अगर व्यक्ति ने वैध तरीक़े से संपत्ति बनायी है तो वह संपत्ति ज़ब्त नहीं की जा सकती |
इस प्रावधान में चल-अंचल दोनों संपत्ति ज़ब्त की सा सकती है | जो भी अंचल संपत्ति है वह ज़ब्त की जाएगी तो जो भी डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट(DM) है वो एक प्रशासन नियुक्त कर देगे सेक्शन 14(3) के अन्तर्गत और जो भी संपत्ति होगी उससे अटैच कर दी जाएगी |
या एक ध्यान देने वाली बात है की BNSS के सेक्शन 85 में कुर्की शब्द का प्रयोग किया गया है और जो इंगलिश शब्द का प्रयोग किया गया वो है Attachment इस मतलब होता है संलग्न करना | जो संपत्ति होगी चल-अंचल वो किसी ना किसी प्रशासन से संलग्न कर दी जाएगी | इस में कही भी demolition शब्द का प्रयोग नहीं किया गया है |
अगर व्यक्ति ने संपत्ति वैध तरीक़े से बनायी है ,और उस संपत्ति को अटैच कर लिया गया है तो section 15(1) में ये प्रावधान है कोई भी व्यक्ति जिसकी संपत्ति ज़ब्त कर ली गई है gangster act में ग़लत तरीक़े से तो वह 90 दिन के अंदर डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट को 90 दिनों के अंदर एक आवेदन प्रत्र देगा और उसमे ये बाते बतायेगा की ये संपत्ति मैंने इस स्रोतों से कमाई है |
अगर डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट को लगता है की इन संपत्ति को कही ना कही वैध तरीक़े से बनाया गया है ,वो तो इन संपत्ति को रिलीज़ कर देगा | इस का प्रावधान सेक्शन 15(2)GangsterAct में दिया गया है |
अगर व्यक्ति की संपत्ति रिलीज़ हो जाती है तो फिर सेक्शन 16(1) में ये प्रावधान है कि चाहे तो राज्य सम्बंधित न्यायालय में आवेदन कर सकता है संपत्ति ग़लत तरीक़े से रिलीज़ की गई है |
Section 17 में ये प्रावधान किया गया है कि कोई भी व्यक्ति पर अगर Gangster Act की करवाई की जाती है और उसको इस Act में बारी कर दिया जाता है तो जो चल-अंचल संपत्ति उसकी अटैच की गई थी ,वो संपत्ति उसको वापस कर दी जाएगी |
Supreme Court Judgement on Gangster Act

- Gabbar Singh Vs State of UP
- Sanjay Pratap Gupta Vs State Of UP((Landmark Judgment)
- Kamal Kishore Saini Vs State Of UP
- Shraddha Gupta Vs Sate Of UP
- Pawan Kumar Vs State of UP
इन सब केस में सुप्रीम कोर्ट ने कुछ बातो पर ज़्यादा ज़ोर दिया है जैसे
- Gang Chart सही तरीक़े से तैयार नहीं किया गया था |
- क़ानून में जो procedure है उसका पालन नहीं हुआ है |
- व्यक्ति की आज़ादी सबसे ऊपर |
- Proper Application of Mind ज़रूरी है |
- Evidence देखना अनिवार्य है |
- DM/SP को evidence देखना ज़रूरी,केवल police report पर blindly एक्शन नहीं लेना है |
Gangster Act लगाने के लिए “Gang” और “Organized Activity” साबित होना ज़रूरी है |
सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि “जो काम जिस तरीके से क़ानून में बताया गया है ,उसी तरीक़े से होना चाहिए- नहीं तो बिल्कुल नहीं “
Gunda Act और Gangster Act एक ही आदमी पर लग सकता है क्या ?
जी बिलकुल दोनों Act एक ही आदमी पर लग सकता है ,लेकिन ये पारिस्थिति पर निर्भर करता है ,आसान भाषा में इसको ऐसे समझो |
Gunda Act प्रिवेंटिव(preventive) law है इसका मतलब भविष्य में शांति भंग ना हो इसलिए DM/ administration एक्शन लेती है जैसे ज़िले से बाहर कर देना |
Gangster Act क्रिमिनल लॉ है जैसे गिरोह बना कर जुर्म करना इसमें पुलिस FIR करके व्यक्ति को जेल भेज देती है फिर उसका ट्रायल चलता है |
ये दोनों एक साथ व्यक्ति पर तब लगता है जब वो गिरोह बनाकर जुर्म करता हो तो पुलिस उस को गैंग का आदमी दिखा कर gangster लगा दिया और ये समाज में शांति ना भंग करे इसलिए उस पर Gunda Act भी लगा दिया |
दोनों Act का नेचर अलग है इसलिए व्यक्ति पर दोनों एक्ट एक साथ चल सकता है |

सुमित कुमार एक अनुभवी क़ानूनी पेशेवर वकील है ,जिनका मुख्य उद्देश क़ानून की जटिलताओं को आसान भाषा में बताना है | क्रिमिनल और सिविल क़ानून के क्षेत्र में 5 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ,इस क्षेत्र में अपने काम के मध्यम से व्यापक रूप में योगदान दिया है |


