GUNDA ACT – पुलिस किसी व्यक्ति पर गुंडा एक्ट ( Gunda Act) की करवाई कब करती है ?

आप लोगो ने अकसर सुना और पढ़ा होगा कि इलाक़े या आसपास किसी व्यक्ति के अपर पुलिस ने Gunda Act लगा दिया | आप लोगो के मन में भी आता होगा कि Gunda Act क्या है ,और Gunda Act की कार्यवाही किन लोगो पर की जाती है और किन पारिस्थितियो में की जाती है |

ये Act को उत्तर प्रदेश सरकार 1970 में लाई थी ,इस Act का फुल फॉर्म है ,The U.P. Control of Goondas Act,1970 (उत्तर प्रदेश गुंडा नियंत्रण अधिनियम,1970)  इस को सामान्य भाषा में “Goonda Act” भी कहा जाता है |

Gunda Act

Gunda Act की कार्यवाही किन लोगो पर होती है ?

Gunda Act

ये कार्यवाही उन लोगो पर होती है जो गुंडा प्रवृत्ति के होते है ,जो बार-बार अपराध करने के आदी हो जाते है ,जैसे उनको अगर किसी जुर्म में साजा भी हो जाये तो भी वो अपराध करते है तो ऐसे व्यक्ति के ऊपर Gunda Act की कार्यवाही की जाती है |

Police Gunda Act की कार्यवाही कब करती है |

पुलिस गुंडा एक्ट की कार्यवाही तब करती है जैसे कोई व्यक्ति किसी गिरोह का सरग़ना हो या उस गिरोह का सदस्य हो या BNS के कुछ sections है अगर वो उन सेक्शन के अपराध को करता है और उसकी छवि से लोगो को डर लगता हो और समाज में डर का माहौल पैदा होता है तो पुलिस उस व्यक्ति पर गुंडा एक्ट की कार्यवाही करती है |

अगर कोई व्यक्ति किसी महिला को देख कर गंदे कमेंट करता है या फिर उसके साथ छेड़छाड़ करता है ,और अगर क़ानूनी कार्यवाही होने के बावजूद उसकी हरकत में कोई भी सुधार नहीं होता है तो police ऐसे व्यक्ति के अपर गुंडा एक्ट के तहत कार्यवाही कर सकती है |

चुनाव के समय प्रशासन गुंडा एक्ट की कार्यवाही ज़्यादा करती है क्योंकि चुनाव के समय  इस तरह के लोग राजनैतिक पार्टी के लिए काम करते है जैसे पैसे दे कर वोट ख़रीदना ,लोगो को किसी व्यक्ति को वोट देने के लिए धमकाना ,बूथ कैप्चरिंग करना |

अपराधियों को कैसे पता चलेगा कि उनके ऊपर गुंडा एक्ट की कार्यवाही की गई है ?

जैसे कोई भी व्यक्ति है अगर उसका आपराधिक रिकार्ड पहले से है ,उसके ऊपर पहले से 2 से ज़्यादा मुक़दमे दर्ज है और उसकी हरकत में कोई भी सुधार नहीं हो रहा है और वो BNS के कुछ section के अपराध को बराबर कर रहा है तो commissioner या ज़िला मजिस्ट्रेट उस व्यक्ति को नोटिस भेजते है | गुंडा एक्ट में सीधे FIR दर्ज नहीं होती है |

व्यक्ति पर जो पहले से मुक़दमे दर्ज है उनके ही अधर पर उसको नोटिस भेजी जाती है और गुंडा एक्ट की कार्यवाही की जाती है |

गुंडा एक्ट में कितनी साजा मिल सकती है |

गुंडा एक्ट में जो प्रावधान है अगर कोई व्यक्ति गुंडा एक्ट का दोषी पाया जाता है तो 6 महीने के लिए उसको ज़िला बदर(Externment) कर दिया जाता है | यही की व्यक्ति 6 महीने तक ज़िले की सीमा में प्रवेश नहीं कर सकता है |

यदि व्यक्ति ज़िले की सीमा में 6 महीने से पहले आया और पुलिस को पता चल गया की इस व्यक्ति के अपर गुंडा एक्ट में कार्यवाही हुई है और ये ज़िला बदर है तो पुलिस उस व्यक्ति पर क़ानूनी कार्यवाही कर सकती है |

इस में पुलिस सीधे FIR दर्ज कर के उसको जेल भेज सकती है |

अगर कोई व्यक्ति बार-बार गुंडा एक्ट में दोषी पाया जा रहा है तो  सक्षम अधिकारी को ये अधिकार है कि वो ज़िला बदर की समय सीमा को बढ़ा सकता है |

Gunda Act की कार्यवाही होने पर क्या करे |

अगर किसी के ऊपर police के द्वारा Gunda Act की कार्यवाही हो गई है ,तो वो उसी की सुनवाई के लिए किसके पास जाएगा |

इस में दो चीजे है ,उत्तर प्रदेश में जहां पर कमीशनरेट व्यवस्था है वहाँ पर Gunda Act की सुनवाई कमिश्नर के अंडर होती है और notice भी वही भेजते है |

उत्तर प्रदेश में जहाँ अभी कमीशनरेट व्यवस्था  नहीं है वहाँ पर ज़िला अधिकारी या उनके समकक्ष अधिकारी जो होगा वो सुनवाई करेगा ,वही आपको नोटिस भेजेगा ,वहाँ आप को हाज़िर होना होगा और अपना जवाब लगाना होगा |

इसमें अधिकारी आप को जमानत लेने ले लिये भी काह सकते है ,ऊसमे आप को bail bond भर कर surety भी देनी पड़ेगी |

अगर किसी व्यक्ति को ज़िला बदर कर दिया गया है और उसको लगता है कि उसको ये साजा ग़लत दी गई है तो इसके लिए ऊपर अपीलेट कोर्ट बनी है जिसको  मंडलायुक्त  कहते है ,गुंडा एक्ट की अपील वहाँ पर होती है ,अगर उसको लगता है कि उस के ऊपर गुंडा एक्ट की कार्यवाही ग़लत हुई है तो वो ज़िलाबदर के आदेश को रद्द कर के आप की साजा को ख़त्म कर सकते है |

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